mrityu ke baad bank loan ki recovery kaise karta hai

Bank Loan Recovery Process in India: इस दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी हैं जो ज़िन्दगी के साथ तथा ज़िन्दगी के बाद भी सुख देती हैं। लेकिन इन्ही के साथ ऐसी भी चीज़ें हैं जो ज़िन्दगी के साथ तो सुख देती हैं लेकिन ज़िन्दगी के बाद बचे हुए लोगों को कष्ट दे जाती हैं। जी हाँ ऐसे ही होता है बैंक से कर्ज लेने का नतीजा।

खैर फालतू की बात न करते हुए सीधे मुद्दे पर आते हैं। कि यदि कोई व्यक्ति किसी बैंक से लोन लेता है और लोन चुकाने के पहले ही उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। अब ऐसी स्थिति में बैंक अपने पैसे की रिकवरी कैसे करेगा। बैंक के पास कौन से तरीके हैं जिनसे वह अपने पैसों को वसूल सकता है।

बैंक लोन की रिकवरी कैसे करता है(Bank Loan Recovery Process in India)

Bank Loan Recovery Process in India: दोस्तों बैंक के पास अपने पैसों की रिकवरी करने के कई तरीके हैं जिनमे मुख्यतः 2 से 3 तरीकों को ही ज्यादा इस्तेमाल में लाया जाता है। इन्ही तीनो के अंतर्गत साड़ी प्रक्रियाएं पूर्ण हो जाती है। इन तरीकों में एक ऐसा भी तरीका है जिससे बैंक को अपना नुकसान करना पड़ता है, बोले तो बैंक का पैसा डूब जाता है।

गारंटर से रिकवरी

यदि लोन लेने वाले व्यक्ति ने लोन लेते समय अपने आवेदन में किसी को गारंटर के रूप में जोड़ा है तो कर्जदार की मृत्यु के बाद बैंक अपना पूरा पैसा उस गारंटर से वसूल करती है। यह आपके लिए एक सबक भी हो सकता है, भविष्य में आपको ऐसे ऑफर मिले तो दानवीर कर्ण बनने से अच्छा है आप सीधे तौर पर मना कर दें।

Insurance Company से रिकवरी

यह तरीका किसी भी बैंक के लिए बहुत आसान माना जाता है। इसमें लोन लेने वाले व्यक्ति के बारे में देखा जाता है कि कहीं उसने कोई इंस्युरेन्स पालिसी तो नहीं ले रखी है। अगर कर्जदार ने कोई Insurance policy खरीदी हुई है तो बैंक लोन की राशि उस Insurance Company से वसूलता है।

गिरवी संपत्ति से लोन की रिकवरी

यह तरीका हर किसी लोन के लिए तो अप्लाई नहीं हो सकता है लेकिन अधिकतर यही होता ही कि बैंक लोन देने से पहले कुछ Security के तौर पर संपत्ति सख्त है। अगर बात करें होम लोन की तो उसमे घर के Documents बैंक के ही पास रहते हैं, अगर आप कोई बिज़नेस लोन लेना चाहते हैं तो आपके बिज़नेस का स्टॉक बैंक के पास होता है।

ऐसे में होता क्या है कि जब बैंक के पास गारंटर या Insurance का विकल्प नहीं होता तो वह सिक्योरिटी वाली संपत्ति को बेंच कर अपना लोन का पैसा Recover करता है। तो यह जरूरी तो नहीं कि हर कोई होम लोन या बिज़नेस लोन लेते हैं। यदि कोई Personal Loan लेता ही तो इसमें तो कुछ सिक्योरिटी राखी नहीं जाती।

ऐसे में जब कर्जदार की मृत्यु हो जाती है और बैंक के पास न गारंटर होता है और न ही इंस्युरेन्स पालिसी तो इस केस में बैंक अपने पैसों की रिकवरी नहीं कर पाता है। और बैंक का पैसा डूब जाता है। लेकिन आज के समय में हर कोई हुशियार हो चूका है बैंक भी अपने नुकसान से बचने के लिए तरह तरह के उपाय कर रही है।

By BABA JI

This is Raghvendra Pratap Pandey Founder of Technoyukti, I am a student also. I completed my graduation in 2018 from Lucknow University. I am from Gonda which is in UP. I do Blogging by passion,Study by culture.I like to share my knowledge and want to share our views, ideas.

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