Diwali Festival – दिवाली क्यों मनाई जाती है ? दीपावली के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में।

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Happy Diwali

स्वागत है आपका एक और हिंदी ब्लॉग में,जैसा की आप को पता ही होगा की भारत का सबसे बड़ा उत्सव दीपावली आने वाला है। तो आज हम दिवाली के बारे में बात करेंगे और हम यहाँ उन बिंदुओं पर बात करेंगे जो अक्सर लोगों के दिमाग मेंआते रहते हैं। जैसे – Diwali Festival,5 Days of Diwali,Laxmi Pooja,दिवाली क्यों मनाई जाती है,दिवाली कैसे मनाई जाती है आदि टॉपिक पर बाते करने वाले हैं। तो चलिए जान लेते हैं –

 

दिवाली :-

दिवाली भारतवर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार है। ये हिन्दुओं का त्यौहार ही होता है ये कहना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इस त्यौहार को अन्य धर्मों के लोग भी मानते हैं। बस उनके मनाने के पीछे का कारन अलग – अलग होता है। यह उत्सव बड़े ही धूम – धाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार है भारत में बहुत ही महत्वा है। यह त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है। यह ५ दिनों का उत्सव होता है।इस त्यौहार को सत्य की असत्य पर विजय,अच्छाई की बुराई पर विजय तथा अन्य कारणों से जाना जाता है।दीपावली प्रकाश का त्यौहार है। इस रात को सभी अपने – अपने घरों के द्वार पर और अंदर दीपक जलते हैं जिनका मतलब होता ही की अन्धकार पर प्रकाश की ही विजय होती है।दीपावली ५ दिनों का त्यौहार होता है इसलिए इसको त्योहारों का समूह भी कहते हैं। घरों को साफ सुब्दर किया जाता यही और हर घर में सुन्दर सुन्दर रंगोली बनाई जाती है। इस त्यौहार का धार्मिक,आध्यात्मिक,सांस्कृतिक व सामजिक विशेषताएं हैं। यह भाई चारे का त्यौहार होता होया है  लोग इस त्यौहार को ख़ुशी से मानते हैं और पास पड़ोसियों के साथ हर्षोल्स के साथ।रात में माँ लक्ष्मी की पूजा होती है फिर एक दूसरे के घर मिठाइयां दी जाती हैं।
इसके साथ कुछ और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालेंगे-
  • दिवाली के 5 दिन।
  • लक्ष्मी पूजा।
  • दिवाली क्यों मानते हैं।
  • दिवाली कैसे मानते हैं।
  • दिवाली का महत्व। 

 

दिवाली के 5 दिन :-

जैसा की हमने बताया कि दीपावली 5 दिनों का त्यौहार होती है। जिसमे अन्य त्यौहार भी शमिल हैं। जैसे – धनतेरस,नरक चौदस,लक्ष्मी पूजा,गोवर्धन पूजा और भाई – दूज ये हैं पाँचो दिन। आइये एक – एक करके जानते हैं इन त्योहारों के बारे में क्या है इनका महत्व –

धनतेरस :-

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क्यों मनाते हैं धनतेरस ?
दिवाली का सबसे पहला दिन धनतेरस है।यह भगवान धन्वन्तरि के लिए मनाया जाता है।आपको समुद्र मंथन के बारे में पता ही होगा।समुद्र मंथन में 14 रत्न निकले थे,उन चौदह रत्नो में 13वें रत्न के रूप में धनवन्तरि जी प्रकट हुए थे वह दिन कृष्णा पक्ष का 13 वां दिन भी था। तभी से इस दिन को  त्यौहार के उपलक्ष में मनाया जाने लगा।इस दिन को बहुत नामों से जाना जाता है जैसे धनत्रयोदशी,धनतेरस आदि। इनको आयुर्वेद का जनक कहा जाता है क्योंकि पुरे विश्व को आयुर्वेद के बारे में इन्होने ही अवगत कराया था।भगवान् धन्वन्तरि ही समुद्र से अमृत का कलश लेकर बाहर आये थे।

नरक चौदस :-

आपने कृष्णा लीला या अन्य धरवाहिक में देखा होगा की श्री कृष्णा ने एक नरकासुर नमक राक्षस का वध किया था। उसी दिन पर यह नरक चौदस मनाया जाता है। नरकासुर भूमि देवी का पुत्र था जोकि बहुत ही बलवान तथा मायाबी था। उसने अपनी से अनेक शक्तियां प्राप्त की थी। सबसे बड़ी बात थी की उसकी मृत्यु उसकी माँ के हाथों ही लिखी गयी थी।जिसके लिए सत्यभामा जी जो की श्री कृष्णा जी की अर्धांगिनी हैं उनको सहायता करनी पड़ी। जी हाँ भूमि देवी ने नरकासुर के आतंक को ख़तम करने के लिए सत्यभामा का जन्म लिया।और श्री कृष्णा के साथ मिलकर नरकासुर का अंत किया और धरती को को और इंद्रलोक को उसकी चंगुल से मुक्त कराया।

लक्ष्मी पूजा :-

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लक्ष्मी पूजा का क्या महत्व है ?
आप के दिमाग में आ रहा होगा की अगर यह त्यौहार भगवा राम के अयोध्या वापस आने की ख़ुशी जाता है तो उनकी पूजा का कही जिक्र क्यों नहीं है। तो  साफ़ करते हुए हम बताना चाहेंगे की समुद्र मंथन में  8वें रत्न के रूप में माता लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं। और इन्होने त्रिलोकी नाथ श्री विष्णु जी का वरण किया। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ में भगवा गणेश की भी पूजा की जाती है क्योकि कोई संतान न होने के कारन लक्ष्मी जी ने गणेश जी को गॉड ले लिया था और जहा जाती थीं गणेश जी को साथ लेके जाती थी।इसलिए हमेशा लक्ष्मी और गणेश दोनों की पूज साथ की जाती है।इस पूजा का बहुत ही महत्व है माँ लक्ष्मी को यश व वैभव की हैं। और सुख समृद्धि तथा शांति के लिए माँ लक्ष्मी की पूज आवश्यक है।इस समय भगवान विष्णु विश्राम करते हैं इसीलिए उनकी आराधना नहीं की जाती है ऐसा शास्त्रों का मनना है।

गोवर्धन पूजा :-

इस पूजा का बहुत अधिक महत्व है।यह त्यौहार दिवाली के अगले ही दिन मनाया जाता है।इस त्यौहार के मानाने के लिए अनेक कथाएं हैं जिनमे से कुछ पर हम चर्चा करेंगे उससे पहले बता दे कि गोवर्धन पूजा का मतलब गायों की पूजा अर्थात इस दिन गायों की पूजा की जाती है।हिंदी धर्म में गायों को लक्ष्मी का ही रूप मन जाता है।इसके विषय में जो कथा प्रचलित है,कहा जाता है की जब श्री राम लंका जाने के लिए समद्र पर पल का निर्माण करवा रहे थे तो हनुमान जी पत्थर लेने गए और गोवर्धन को उठा लाये परन्तु तब तक निर्माण कार्य पूर्ण हो चूका था।तो गोवर्धन को कष्ट हुआ तो श्री राम ने उनसे प्रतिज्ञा की की अगले जन्म में उनका अपने हाथों पर धारण करेंगे और जब श्री कृष्णा के रूप अवतार लिए तब इंद्रा के अहंकार को चूर करने के लिए पर्वत राज गोवर्धन को अपनी उँगलियों पर धारण करके जनता की रक्षा भी की और इंद्रा को उसकी गलती का एह्साह भी कराया। तभी से इस दिन को गोवर्धन पूजा क रूप में मनाया जाने लगा।

भाई – दूज :-

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भाई – बहन का त्यौहार होता है भाई – दूज।यह दिवाली का 5 वां दिन होता है। इस दिन सभी भाई अपनी बहन के यहाँ जाते हैं और बहने अपने भाई की पूजा करती हैं और लम्बी उम्र की तथा भाई बहन के रिश्ते को मजबूत बनाने की प्रार्थना करती हैं।एक बार की बात है यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर गए और तभी यमुना जी अपने भाई को द्वार पर देख कर उनकी खुसी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि बहुत दिनों बाद उनके भैया उनके द्वार आये थे।जब यान देवता वापस जाने लगे तो यमुना जी ने एक वरदान माँगा की साल में एक बार इस दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाये। इस दिन को यमदुतिया भी कहते हैं।

दिवाली क्यों मानते हैं :-

दीपावली को धर्म की अधर्म पर विजय,अच्छाई का बुराई विजय,प्रकाश का अंधकार पर विजय के रूप में मनाते हैं। यह त्यौहार हिन्दू ही नहीं अनेक समुदाय लोग मानते हैं। इस त्यौहार को हिन्दू,जैन,सिक्ख आदि धर्मों के लोग भी मनाते हैं।

दिवाली कैसे मनाते हैं :-

दिवाली हिन्दू का सबसे बड़ा त्यौहार है इसको मनाने अनेक कारन हैं। यह उजालों का त्यौहार है।यह त्यौहार मनाने की अनेक विशेषताएं हैं। अलग अलग राज्यों में अलग अलग तरीकों से मनाई जाती है।दीपावली मानाने की बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं जिनके कारन यह त्यौहार मनाया जाता है।
  • राम की अयोध्या वापसी –
 
रावण का वध करके ,धर्म का विजय पताका लहरा कर अयोध्या वापस लौटे थे तो अयोध्या वासी श्री राम के स्वागत में पूरी अयोध्या नगरी को दीप से प्रकाशित करके स्वागत की तैयारी करने में लगे थे।एक मान्यता तो यही है की राम की घर वापसी पर ख़ुशी से डीप जलाये गए थे तभी से उस दिन को दिवाली जाने लगा।
  • लक्ष्मी और धन्वन्तरि प्रकट हुए –
 
दिवाली 5 दिनों का उत्सव होता है। समुद्र मंथन के 8 वें रत्न के रूप में माँ लक्ष्मी ने जन्म लिया और यश तथा वैभव की देवी की उपाधि कहा दी गयी। माँ लक्ष्मी को यश तथा वैभव की देवी कहते हैं। लक्ष्मी जी श्वेत कमल पर विराजमान होकर बाहर निकली थीं। इस माँ लक्ष्मी की पूजा करके इस त्यौहार को मनाया जाता है।
 मंथन के 13 वें रत्न के रूप में धन्वन्तरि जी प्रकट हुए जिनको इंद्रलोक का वैद्य बनाया गया और इन्होने सम्पूर्ण संसार में आयुर्वेद का निर्माण किया। धन्वन्तरि जी की पूजा की जाती है।
  • पांडव वनवास –
 
एक मान्यता यह भी है की जब पांडव 12 वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञात वास पूरा करके घर लौटे थे तो उनके आने की ख़ुशी में हस्तिनापुर में खुसी की लहार थी कहा जाता है तभी से यह मनाया जाता है।
  • विक्रमादित्य –
 
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य जो कि उज्जैन के राजा था इसी दिन उनका राजतिलक करके कार्य – भार सम्हाला था।

दिवाली का महत्व :-

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क्या महत्व है दीपावली का ?
इस उत्सव का ऐतिहासिक,सांस्कृतिक,धार्मिक और पौराणिक महत्व है। इसका हमारे जीवन में में भी बहुत महत्व है। आइये जानते है क्या क्या महत्व हैं इसके –
  • हिन्दू नव वर्ष :-
 
हिंदुयों के लिए यह  दिन इस लिए भी होता है क्योंकि यह दिन भारत का नया साल होता है। नए साल की शुरुआत होती है। राम की घर वापसी तथा लक्ष्मी धन्वन्तरि अवतार तथा अन्य कथाओं को पढ़ने के बाद पता चलता है की हिन्दू धर्म में इसका क्या महत्व है। ये कार्तिक माह में मनाया जाता है। 
  • जैन :-
 
जैन धर्म के लिए इस त्यौहार का महत्व इसलिए है क्योंकि जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।
  • सिक्ख :-
 
सिख धर्म में इसी दिन ये लोग अपने तीसरे गुरु अमरदास को प्रणाम करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। स्वर्ण मंदिर में अमरदास का पूर्ण चित्रण किया गया है।
  • फसलों का उत्सव :-
 
कार्तिक माह का महीना खरीफ की फसल का होता है।  इस दिन फसलों की भी पूजा की जाती है। सभी किसान भाई अपनी फसल की पूजा करते हैं और आवश्यक सामग्री के साथ पूजा को सम्पन्न करते हैं।

निष्कर्ष :-

पूरी जानकारी के बाद यह निष्कर्ष निकलता है की हमें हमेशा अच्छाई,धर्म  नेक कार्य करने चाहिए इससे हमारे जीवन में सुख समृद्धि बानी रहे और क्योंकि अन्नय और अधर्म की कभी भी जीत नहीं हो सकती। सबके साथ भाई चारे का व्यवहार रखे सुख दुःख में काम आये और कंधे से कन्धा मिलके चलने में मदद करें। 
आपको दिवाली की अनंत शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ। आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताएं। और हमारे ब्लॉग को Subscribe और Share जरूर करे जिससे आपको आने वाली जानकारी मिल सके।
                       आपका बहुत बहुत धन्यवाद 

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